जनहित याचिका अब ‘निजी हित याचिका’ बन गई है : सर्वोच्च न्यायालय 

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन

संदर्भ

  • सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने कहा है कि जनहित याचिका (PIL) हाल के समय में ‘निजी हित याचिका’, ‘प्रचार हित याचिका’ और यहाँ तक कि ‘पैसा’ तथा ‘राजनीतिक’ हित याचिका में परिवर्तित हो गई है।

जनहित याचिका (PIL)

  • जनहित याचिका (PIL) का अर्थ है न्यायालय के समक्ष ऐसा मामला या याचिका दायर करना जिसका उद्देश्य जनहित की रक्षा, संरक्षण या प्रवर्तन करना हो।
  • यह एक विशिष्ट तंत्र है जिसे भारतीय न्यायपालिका ने आपातकाल के बाद प्रारंभ किया ताकि “सामाजिक न्याय आम आदमी की पहुँच में लाया जा सके।”
  • संविधान में PIL का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, बल्कि यह न्यायिक व्याख्या के माध्यम से विकसित हुआ है।
  • सभी भारतीय नागरिक या संगठन सर्वोच्च न्यायालय में अनुच्छेद 32 अथवा उच्च न्यायालयों में अनुच्छेद 226 के अंतर्गत जनहित याचिका दायर कर सकते हैं।
    • याचिका दायर करने वाले व्यक्ति या संगठन को न्यायालय को यह सिद्ध करना होता है कि याचिका जनहित से संबंधित है और इससे व्यापक जनसमुदाय को लाभ होगा।
  • PIL केवल केंद्र सरकार, राज्य सरकार या नगर सरकारों के विरुद्ध दायर की जा सकती है, व्यक्तियों के विरुद्ध नहीं।

भारत में कुछ ऐतिहासिक निर्णय

  • हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य: भारत में PIL का प्रथम दर्ज मामला, जिसने कैदियों और विचाराधीन कैदियों की अमानवीय परिस्थितियों पर ध्यान आकर्षित किया।
  • विशाखा बनाम राजस्थान राज्य: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित मामला। इसके परिणामस्वरूप 1997 में विशाखा दिशानिर्देश लागू हुए।
  • एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ: गंगा बेसिन में प्रदूषण से संबंधित मामला। लाखों लोगों पर जल और वायु प्रदूषण के प्रभावों को रोकने हेतु निर्देश दिए गए।
  • परमानंद कटारा बनाम भारत संघ: इस मामले में अस्पतालों को आपातकालीन दुर्घटना मामलों को पुलिस जांच लंबित होने की चिंता किए बिना संभालने की सुविधा देने की मांग की गई।
    • निर्णय ने सार्वजनिक और निजी अस्पतालों/डॉक्टरों को सड़क दुर्घटना पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सहायता देने को अनिवार्य बनाया।

जनहित याचिका का महत्व

  • यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक निकाय अपनी शक्तियों की सीमाओं के अंदर उचित रूप से कार्य करें और सटीक निर्णय लें।
  • यह न्यायाधीशों को विधायन समझने और कानून विकसित करने में सहायता कर कानून के दायरे का विस्तार करती है।
  • यह उपभोक्ता कल्याण, पर्यावरण और मानवाधिकार जैसे व्यापक सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • यह कमजोर लोगों को आवाज देती है और उन्हें अपने अधिकारों का समर्थन करने का मंच प्रदान करती है।
  • यह मीडिया कवरेज और बहसों के माध्यम से महत्वपूर्ण सार्वजनिक समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होती है।

जनहित याचिका से संबंधित चिंताएँ

  • भारतीय न्यायपालिका पहले से ही लंबित मामलों के भारी भार से ग्रस्त है, और PIL याचिकाएँ इस भार में वृद्धि कर सकती हैं।
  • जिन याचिकाओं में कोई महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा नहीं होता, वे न्यायालय का समय व्यर्थ कर सकती हैं।
  • कभी-कभी PIL का दुरुपयोग व्यक्तिगत शिकायतों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है, जिससे जनहित याचिका निजी हित याचिका बन जाती है।
  • न्यायालय के निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन न होना, PIL की सफलता में बड़ी बाधा है।
  • कभी-कभी PIL न्यायिक अतिक्रमण का कारण बन सकती है, अर्थात न्यायालय विधायी और कार्यकारी शाखाओं के क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं।

निष्कर्ष

  • भारत में जनहित याचिका (PIL) जनहित मामलों की रक्षा और संरक्षण के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है। इसने भारतीय न्यायपालिका को सामाजिक न्याय के लिए एक सक्रिय संस्था में परिवर्तित किया है, किंतु इसकी प्रभावशीलता जिम्मेदार उपयोग पर निर्भर करती है।

स्रोत: TH

 

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